TFI Desk

TFI Desk

Re Kajri Kahe Tu Ghabraaye

जे कायर सो बारम्बार युद्ध युद्ध चिल्लाये जो फट्टू प्रवित्ति मानुष वो निडर राग दोहराए लोभी, धूर्त, चोर, उचक्के इमानदार कहत ना अघाए कहत मिसिर जी, बारम्बार रे कजरी काहे तू घबराए काहे...

Page 838 of 840 1 837 838 839 840