एक खुला पत्र राहुल गाँधी को
प्यारे राहुल भैय्या, कैसे हो? क्या कहा भैय्या बोला तो अच्छा लगा? वैसे क्या बोलूं उम्र तो आपकी चाचा वाली हो गयी है ...
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प्यारे राहुल भैय्या, कैसे हो? क्या कहा भैय्या बोला तो अच्छा लगा? वैसे क्या बोलूं उम्र तो आपकी चाचा वाली हो गयी है ...
ज़ालिम ज़माने की मार से तंग आकर दिनोंदिन बढती महंगाई से घबरा कर हमने आत्महत्या की सोची फिर सोचा - ज़िन्दगी भूख में ...


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